हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि जब मेरी उम्मत अपने उलमा से बुग्ज़ रखने लगेगी, और बाज़ारों की इमारतों को बुलंद और ग़ालिब करने लगेगी, और माल व दौलत पर निकाह करने लगेगी (यानी निकाह में बजाए दीनदारी और तक़वा के मालदारी को देखा जाएगा) तो हक़ तआला शानहु उन पर चार क़िस्म

के अज़ाब मुसल्लत फ़रमा देंगे:

1) क़हत साली हो जाएगी।

बादशाह की तरफ़ से मज़ालिम होने लगेंगे।

(3) हुक्काम ख़ियानत करने लगेंगे।

(4) दुश्मनों के पे दर पे हमले होंगे।

(फ़तावा रहीमिया : 82/2-83, किताबुल ईमान, मआसी और तौबा का बयान)