ज़िना एक महान गुनाह और सख्त कबीरा जुर्म है।
कुरान-ए-करीम ने इसके करीब जाने से भी मना फरमाया है।
मौजूदा दौर में फितनों की कसरत है और गुनाह के रास्ते आसान हो गए हैं।
नौजवानों के लिए सबसे बड़ा चैलेंज अपनी निगाहों की हिफाजत है।
निगाह की बे एहतियाती दिल को आलूदा कर देती है।
दिल की खराबी आखिरकार अमल की खराबी का सबब बनती है।
इसलिए सबसे पहले निगाह नीची रखने की आदत डालनी चाहिए।
मोबाइल और इंटरनेट का गलत इस्तेमाल बहुत बड़ा फितना है।
गैर जरूरी सोशल मीडिया से परहेज निहायत जरूरी है।
तन्हाई में अल्लाह ताला को याद रखना ईमान की अलामत है।
यह सोचना चाहिए कि अल्लाह मुझे देख रहा है।
शर्म व हया ईमान का अहम हिस्सा है।
जिस दिल में हया जिंदा हो वह गुनाह से बच जाता है।
बे हयाई वाले माहौल से दूर रहना चाहिए।
दोस्तों का इंतखाब बहुत सोच समझ कर करना चाहिए।
बुरे दोस्त इंसान को गुनाह की तरफ ले जाते हैं।
अच्छे और नेक दोस्त गुनाह से रोकते हैं।
नमाज की पाबंदी ज़िना से बचने का मजबूत जरिया है।
नमाज दिल को सुकून और नफ्स को काबू में रखती है।
कुरान-ए-करीम की तिलावत दिल को नूर बख्शती है।
जिक्र-ए-इलाही से शैतानी वसवसे कम हो जाते हैं।
नफ्स को काबू में रखने के लिए रोजे रखना मुफीद है।
नबी करीम ﷺ ने रोजे को शहवत तोड़ने वाला फरमाया है।
निकाह को आसान बनाना मुआशरे की जिम्मेदारी है।
निकाह ज़िना से बचने का सबसे महफूज रास्ता है।
गैर जरूरी मेल जोल से बचना चाहिए।
परदे का एहतिमाम मर्द व औरत दोनों के लिए जरूरी है।
फहश गुफ्तगू और मजाक से दूरी इख्तियार करनी चाहिए।
दिल में गुनाह का ख्याल आए तो फौरन दुआ करनी चाहिए।
अल्लाह से आफियत और पाक दामनी मांगनी चाहिए।
अपने वक्त को नेक कामों में मशगूल रखना चाहिए।
फारिग वक्त गुनाह की तरफ ले जाता है।
अपने अंजाम को याद रखना बहुत जरूरी है।
कब्र और आखिरत का हिसाब जहन में रखना चाहिए।
ज़िना दुनिया व आखिरत दोनों में रुसवाई का सबब है।
यह अमल खानदान और मुआशरे को तबाह कर देता है।
गुनाह वक्ती लज्जत और दायमी नुकसान है।
अकलमंद वह है जो अंजाम को देखे।
अल्लाह ताला पाक रहने वालों को पसंद फरमाता है।
जो शख्स गुनाह छोड़ देता है अल्लाह उसे बेहतर बदल अता करता है।
तौबा का दरवाजा हर वक्त खुला है।
लेकिन गुनाह पर जरी होना बहुत खतरनाक है।
हमें अपने नफ्स का मुहासबा करते रहना चाहिए।
हर दिन यह नीयत करें कि अल्लाह को नाराज नहीं करेंगे।
अल्लाह से सच्ची मदद मांगें, वह जरूर मदद फरमाएगा।
पाकीजा जिंदगी ही हकीकी कामयाबी है।
अल्लाह ताला हम सब को ज़िना जैसे कबीह अमल से बचने की तौफीक अता फरमाए और अपने हिफ्ज व अमान में रखे आमीन या रब्बुल आलमीन
मुफ्ती मोहम्मद सादिक अमीन कासमी
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