दुआएं तो अल्लाह को सबसे प्यारी होती हैं और टूटी फूटी दुआएं जिनको जोड़ने के लिए हमें लफ्ज़ भी नहीं मिलता जिन्हें तरतीब    देने के लिए हमारे पास हुनर ही नहीं होता वो दुआएं अल्लाह की सबसे लाडली  दुआएं होती हैं ।۔۔۔۔۔۔۔क्योंकि  अल्लाह जानता है  अपने दर्द के किस मुकाम पर पहुंच कर और कितनी तड़प😓 से मांगी गई हैं.. ۔۔कि ज़बान भी उन्हें बयान  करने से कासिर हो गई   तब अल्लाह को अपने बंदे पे बड़ा प्यार आता  है जब उसका बंदा आधी अधूरी दुआएं करके कहता  है ।۔۔۔۔۔अब क्या कहूं कैसे कहूं तो तू  सब जानता है मेरी खामोशी समझ ले  यानी आप ये मान रहे हैं  कि वो सब जानता है तो फिर अल्लाह भी ये कहता है कि जान लिया मैंने सुन लिया और अब तैयार हो जाओ  मैं तुम्हें अता करने वाला हूं  तुम्हारी बेतरतीब दुआओं से तुम्हारे नसीब को तरतीब देने वाला हूं  ।۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔और फिर कैसे चीजें अपनी जगह पर वापस आ जाती हैं  और कैसे दिल की बिखरी हुई दुआएं सिमट जाती हैं और हम तो बस देखते ही रह जाते हैं कि कैसे अल्लाह ने हमारी एक आह व पुकार पे  हमारी  ख्वाहिश हमारे दिल की मुरादें पूरी कर दी बेशक अल्लाह रहमान व रहीम  है अल्लाह ताला से  मांगते रहें  और कभी उदास न हों  अल्लाह ताला दिलों का हाल बेहतर जानता है और सब समझता है वो चींटियों की धड़कन को भी सुनता है हमें तो फिर अशरफ उल मखलूकात का दर्जा दिया है दुआएं कभी रद्द  नहीं होती ।۔۔۔۔



अज़ कलम 
ज़करिया परवेज़