से, नसीम हुसैन लखीम पुरी
कातिबीन वही
हुज़ूर अक़दस ﷺ पर जब वही नाज़िल होती तो आप ﷺ उसको याद कर लेते और कुछ सहाबा किराम रज़ि अल्लाहु अन्हुम अजमईन को लिखने पर मामूर कर दिया था, आप उनसे वही लिखवा लेते थे आपके दौर में वही को लिखने वाले सहाबा किराम ये हैं।
सैयदना अबु बक्र सिद्दीक़ : आपका नाम ज़माना जाहिलियत में अब्दुल कअबा था इस्लाम लाने के बाद आपका नाम नबी ﷺ ने अब्दुल्लाह रखा अबु बक्र कुनियत, और सिद्दीक़ लक़ब से मशहूर हुए आप सबसे पहले खलीफ़ा हैं, आप अशरा मुबशशरा में शामिल हैं, आपकी विलादत आम अल फ़ील के दो बरस और छह माह बाद ५७३ ء में हुई, आपके वालिद का नाम अबू क़हाफ़ा, और वालिदा का नाम उम अल खैर सलमा बिन्त सखर था, हज़रत अबु बक्र रज़ि अल्लाहु अन्हु की वफ़ात जमादी अल अव्वल १३ھ मुताबिक़ ६३४ء को हुई हुज़ूर अक़दस ﷺ के हमराह रौज़ा नबी ﷺ में आराम फ़रमा हैं।
सैयदना हज़रत उमर : आपका नाम उमर, कुनियत अबू हफ़्स, लक़ब फ़ारूक़ है, वालिद का नाम ख़त्ताब, और वालिदा का नाम ख़त्मा था, हिजरत से चालीस साल क़ब्ल ५८६ء में विलादत हुई, आपके इस्लाम लाने से इस्लाम और मुसलमानों को बहुत तक़वियत मिली, आप मक्का के चुनिंदा पढ़े लिखे लोगों में से एक थे, हज़रत अबू बक्र रज़ि अल्लाहु अन्हु के बाद आप दूसरे खलीफ़ा हैं आपकी वफ़ात २३ھ मुताबिक़ ६४४ء को हुई आपको रौज़ा नबी ﷺ में हज़रत अबु बक्र रज़ि अल्लाहु अन्हु के पहलू में दफ़न किया गया।
सैयदना हज़रत उस्मान बिन अफ़्फ़ान : आपका नाम उस्मान था, अबू अब्दुल्लाह और अबू उमर कुनियत थी, ज़ुन्नूरैन लक़ब था, वालिद का नाम अफ़्फ़ान और वालिदा का नाम अरवा था, आप इस्लाम के तीसरे खलीफ़ा और हुज़ूर ﷺ के दामाद थे यके बाद दीगरे अल्लाह के नबी ﷺ ने अपनी दो साहिबज़ादियों का निकाह आपसे किया, आपकी विलादत ५७४ء में हुई और वफ़ात ३५ھ मुताबिक़ ६५६ ء में हुई, आप जन्नत अल बक़ी में मदफ़ून हैं।
सैयदना हज़रत अली : नाम अली था, कुनियत अबू तुराब, हैदर लक़ब था, वालिद का नाम अबू तालिब था, आप हुज़ूर अक़दस ﷺ के चचा ज़ाद भाई और दामाद थे, नीज़ आप इस्लाम के चौथे खलीफ़ा भी हुए, आपकी विलादत बा सआदत ५९९ء आम अल फ़ील के तीस साल बाद १३ रजब अल मुरज्जब बरोज जुमा हुई, आप बच्चों में सबसे पहले इस्लाम लाने वाले हैं आपकी वफ़ात २१ रमज़ान ४०ھ मुताबिक़ २८ जनवरी ६६१ء को हुई
हज़रत : आपका नाम मुआविया है, और वालिद का नाम अबू सुफ़ियान है, वालिदा का नाम हिन्द बिन्त उत्बा है, आपकी विलादत नबी ﷺ की हिजरत से लगभग १५ साल क़ब्ल ५९७ء में हुई, आप उमवी ख़िलाफ़त के बानी हैं आपकी वफ़ात अप्रैल ६८०ء दमिश्क़ में हुई।
हज़रत अबान बिन सईद : आपका नाम अबान और वालिद का नाम सईद बिन अल आस बिन उमैया है, आप इस्लाम लाने से क़ब्ल इस्लाम और अहल इस्लाम के सख़्त दुश्मन थे, लेकिन जब ईमान ले आए तो कातिब वही होने का शर्फ हासिल हुआ।
हज़रत ख़ालिद बिन वलीद : आपका नाम ख़ालिद, वालिद का नाम वलीद, अबू सुलेमान कुनियत, सैफ़ुल्लाह लक़ब, आप इस्लाम के एक अज़ीम कमांडर और सिपह सालार थे, आपका शुमार मक्का के रुअसा में होता था मक्का से ले कर ताइफ़ तक उनके बाग़ात थे, आपकी विलादत की सही तारीख मज़कूर नहीं है अलबत्ता ये मालूम होता है कि आप ज़ुहूर इस्लाम के वक़्त १७ साल के थे, आपकी वफ़ात ख़िलाफ़त उमर रज़ि अल्लाहु अन्हु के पांचवें साल हुई।
हज़रत उबई बिन काब : हज़रत उबई बिन काब वो मुबारक हस्ती जिन के मुताल्लिक़ अल्लाह के नबी ﷺ ने फ़रमाया ये सब क़ारियों के सरदार हैं, आप मुमताज़ क़ुर्रा में से हैं, जिन ख़ुश नसीब सहाबा ने हुज़ूर ﷺ के दौर में क़ुरान को जमा किया उन में आप सर फ़हरिस्त हैं, आपकी वफ़ात ६४९ء में हुई।
हज़रत ज़ैद बिन साबित : हज़रत ज़ैद बिन साबित बड़े फ़क़ीह थे, आपने सुग़र सन्नी में ही इस्लाम क़ुबूल कर लिया था उस वक़्त आपकी उम्र ग्यारह साल थी, आपकी विलादत बा सआदत ६११ء को हुई और आपकी वफ़ात ६६५ء को हुई।
हज़रत
: साबित आपका नाम, और कुनियत अबू मुहम्मद है, बदरी सहाबी हैं, हुज़ूर ﷺ जब हिजरत करके मदीना तशरीफ़ ले गए तो सारा मदीना इस्तिक़बाल के लिए उमड आया इस मौक़े पर आप ने ख़ुतबा दिया जिस में फ़रमाया कि हम आपकी हर इस चीज़ की हिफ़ाज़त करेंगे जिस से अपनी जान ओ औलाद की हिफ़ाज़त करते हैं,
लेकिन हम को इस का मुआवज़ा क्या मिलेगा, आप ﷺ ने फ़रमाया जन्नत तो तमाम मजमा पुकार उठा कि हम राज़ी हैं आप १२ھ में जंग यमामा के दिन मुसैलमा कज़्ज़ाब की फ़ौज से जंग करते हुए शहीद हुए।
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