माह रमज़ानुल मुबारक की बरकात इतनी ज़्यादा हैं कि जब कोई बंदा रोज़ा रखता है तो उसकी बख़्शिश के लिए हवाओं में परिंदे, बिलों में चींटियाँ और पानी में मछलियाँ दुआएँ किया करती हैं और जब और जब रोज़ादार शख़्स दुआएँ करता है तो अल्लाह के फ़रिश्ते उसकी दुआओं पर लबैक और आमीन कहा करते हैं......इतना बाबरकत महीना है कि इसकी एक एक बरकत पाने वाले "वली" बनते हैं और अबदाल बना करते हैं। अगर हम इन बरकात से फ़ायदा उठा सकें तो हमें भी अल्लाह जल्ल शानहू की मारफ़त नसीब हो जाए।

अल्लाह ताला हम सब को रमज़ान की तमाम बरकात समेटने वाला बनाएँ.....🤲🏻