वह 12 साल का नन्हा मासूम बच्चा जिसके हाथ में उसकी माँ ने गन पकड़ा दी, हालाँकि उसे तो कलम पकड़ना चाहिए था।
उस परी ने हाथ में क्रूज मिसाइल पकड़ा हालाँकि उसकी दुल्हन बनने की उम्र थी।
जी ये शाम की सरज़मीन थी जहाँ 50 लाख इंसान क़त्ल किए गए।
ज़िंदा तक जलाया गया।
मेरी बच्चियों की अस्मत دری की गई।
और बच्चे जनने पर भी मजबूर किया गया।
क्या आपने सोचा कि आख़िर वह कौन था?
किसने ये हालात पैदा किए?
सुन्नी शिया फ़सादात की आड़ में हज़ारों सुन्नी नौजवान ज़बह किए गए।
उस वक़्त कोई न बोला।
मुफ़्ती तक़ी उस्मानी साहब के क़ातिल ईरान के गुमाश्ते नहीं थे क्या?
क्या झंग में एक ही दिन में कई कई जनाज़े उलमा के नहीं उठे?
क्या उलमाए किराम को ये नहीं कहा जाता था कि आप को टारगेट करने के लिए ईरान से लोग आरहे हैं।
वह लोग जो इस वक़्त ईरान की हिमायत और उसकी लीडर शिप पर अफ़सोस कर रहे हैं वह जाएँ शाम की माँ से पूछें।
जिन्होंने खुमैनी इंक़लाब के नाम पर इंसानों को ज़िंदा जलाया।
क्या उसने लेबनान के मामलात में मुदाख़लत नहीं की।
क्या उसने इराक़ में मैं मुसलमानों को शहीद नहीं किया।
क्या अब भी आख़िर शाम में ईरानी क्यों बार बार बग़ावत करना चाहते हैं।
चलें छोड़ें क्या आपने उसके अक़ाइद पढ़े।
नहीं तो उसको शहीद कहने से पहले ये ज़रूर पढ़ें।
ईरान में कोई सुन्नी मस्जिद नहीं बना सकता।
आखिर अमेरिका से बदला लेने के लिए सऊदी तेल कंपनी को निशाना बनाने की वजह?
पाकिस्तान में एहतेजाज के नाम पर बच्चों के स्कूल को आग लगाने की वजह?
बुलेट प्रूफ जैकेट पहन कर क्या एहतेजाज किया जाता है?
वह बी एल ए जो सिर्फ़ क़ौमियत की बुनियाद पर ही लड़ती है इस्लाम से उस का दूर का भी वास्ता नहीं उसे जगह देने की वजह?
सद्दाम हुसैन को फाँसी दिलाने में आप का किरदार।
बशर अल असद को आगे लाने में आप का किरदार।
पाड़ा चनार में اسلحہ फ़राहम किया ताकि सुन्नियों को मारा जा सके।
क्या आपने नाटो के ख़िलाफ़ लड़ने वाले मुजाहिदीन को गिरफ्तार नहीं किया था।
हालानके आप तो अमेरिका के ख़िलाफ़ थे फिर आप ने क्यों अमेरिका मुख़ालिफ़ लोगों को गिरफ्तार किया वह भी अफ़ग़ानिस्तान से।
क्या आपने मज़ार शरीफ़ में शियों को اسلحہ फ़राहम नहीं किया था ताकि तालिबान को शिकस्त दे कर शिया स्टेट बनाया जाए।
क्या आपने पाकिस्तान में खुमैनी इंक़लाब की जद्दोजहद के लिए क्वेटा की खवातीन के नाज़ुक़ आज़ा नहीं काटे।
मगर इस के बावजूद हम आप से ताज़ियत करते हैं उन बच्चों की जो बे गुनाह मारे गए।
और हम आप को शहीद कैसे कर सकते हैं जबकि आप तो उसूल काफ़ी को अपना मेयार बनाते हो।
जो खुलफ़ाए अरबा का इंकार तो کجا गालियाँ तक देते हो।
मैं ने सोचा था कि रमज़ान मुबारक में नहीं लिखूँगा मगर शायद कि ٫٫٫٫٫٫मुझे मजबूर कर दिया कलम उठाने पर उन लोगों ने जो कहते हैं कि 86 साला बूढ़ा इस्लाम के लईए डट गया।
जिन के घर उजड़ने
 जिन के बच्चे यतीम हुए
 जो ज़िंदा जलाए गए
जिस ने इसराइल से बढ़ कर शामियों को क़त्ल किया
जिस ने इराक़ में अमेरिकियों से बढ़ कर इराक़ियों को क़त्ल किया।
आप का खंजर हमेशा मुसलमानों के ख़िलाफ़ उठा।
माज़ी क़रीब में भी आप ने अर्दोग़ान के ख़िलाफ़ बग़ावत की कोशिश की।
दोनों ज़ालिम पड़े।
सुना है दोनों मर गए।
कोई अफ़सोस नहीं।
आप ने भी सद्दाम हुसैन की शहादत के मौक़े पर जश्न मनाया था।
अमेरिकियों का शुक्रिया अदा किया था।
क्या आप को याद है